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निवेशकों के लिए असली परीक्षा

निवेशकों के लिए असली परीक्षा
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत इस साल अक्टूबर से पहली बार 5जी सेवा लांच करने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में दूरसंचार उद्योग के लिए असली परीक्षा निवेशकों के लिए असली परीक्षा टावरों से लेकर रेडियो एक्सेस नेटवर्क तक एक निर्बाध एवं निरंतर अनुभव सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत 5जी बुनियादी ढांचा बनाने में है।

फर्जीवाड़े के खेल में लड़कियां भी शामिल, असली अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के लिए 10 लाख रुपए में किया सौदा – एडमिट कार्ड पर फर्जी फोटो भी चिपकाया

जयपुर। रीट से एक दिन पहले जयपुर में पुलिस ने जालोर से परीक्षा देने आई दो युवतियों को गिरफ्तार किया है। यह पहला मामला है, जब रीट में फर्जी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा देने के मामले में युवतियां पकड़ी गई हैं। डीसीपी (पश्चिम) ऋचा तोमर ने बताया कि गिरफ्तार प्रमिला विश्नोई (22) गांव सरनाउ, सांचौर, जिला जालौर की रहने वाली है। दूसरी कुमारी अनन्या चौधरी उर्फ झुम्मी (19) निवासी गांव लुणियासर तहसील सांचौर जिला जालौर की है। ये दोनों जयपुर में बनीपार्क में कांतिचंद रोड पर किसान बालिका शिक्षण संस्थान (किसान गर्ल्स हॉस्टल) में ठहरी हुई थीं। दोनों युवतियां भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं।खुलासा हुआ है कि प्रमिला की जगह परीक्षा देने के लिए अनन्या उर्फ झुम्मी परीक्षा में बैठने वाली थी। पूछताछ में सामने आया कि प्रमिला विश्नोई ने परीक्षा का फॉर्म भरते समय अनन्या चौधरी उर्फ झुम्मी का फोटो चिपकाया था। इस वजह से जारी हुए एडमिशन लेटर में भी असली अभ्यर्थी प्रमिला की फोटो की जगह अनन्या उर्फ झुम्मी की फोटो ही लगी हुई आई। इसके लिए 10 लाख रुपए देना तय हुआ था। आरोपी युवतियों ने फर्जी अभ्यर्थी की फोटो लगाकर आधार कार्ड भी तैयार करवाया था। पुलिस का मानना है कि इन दोनों के पीछे कोई और गैंग शामिल है। उनका पता लगाया जा रहा है।

भारत चुनाव में होगा फेसबुक का असली इम्तहान : जुकरबर्ग

Facebook will be the real test of India elections: Zuckerberg

फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने भारत में होने वाले आगामी चुनावों को अपनी कंपनी के लिए ‘रियल टेस्ट’ की संज्ञा दी है। साथ ही इस विशालकाय सोशल मीडिया कंपनी के लिए ब्राजील और यूरोपीय संघ (ईयू) के चुनावों को भी चुनौतीपूर्ण बताया। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि फर्जी यूजर्स के खिलाफ बड़े पैमाने पर की गई हालिया कार्रवाई के बाद उनकी कंपनी इन चुनावों में सही आकलन करेगी।

बता दें कि अमेरिका स्थित कंपनी को अपने करीब 8.7 करोड़ उपयोगकर्ताओं का डाटा कैंब्रिज एनालिटिका फर्म को लीक करने के विवाद में घिरा रहना पड़ा है। इस डाटा के कारण कई देशों में चुनावों को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया गया था। साथ ही फेसबुक प्लेटफार्म पर भारी संख्या में फेक न्यूज की भरमार होने के कारण भी उसे विवाद का सामना करना पड़ा था।

भारत सरकार ने भी फेसबुक को डाटा लीक के लिए दो कानूनी नोटिस भेजे थे। इन विवादों के बाद अपनी कंपनी की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे जुकरबर्ग ने निवेशकों से कहा कि अगले 18 महीनों में अमेरिका के बाहर ब्राजील, भारत और ईयू में अहम चुनाव हैं और ये फेसबुक की असली परीक्षा साबित होंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ले रहे मदद
जुकरबर्ग ने बताया कि वे झूठे खातों की रोकथाम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद ले रहे हैं। ये खाते बहुत सारा समस्या पैदा करने वाला कंटेंट पैदा कर रहे हैं। साथ ही बहुत सारे ऐसे पेजों को भी रोक रहे हैं, जो विज्ञापनों के जरिए झूठी खबरें फैला रहे हैं। बता दें कि पूरे विश्व में 2 अरब यूजर्स वाली फेसबुक को भारत में करीब 20 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं, जिस कारण इस पर छोटी सी खबर भी बहुत बड़ी आबादी तक तेजी से फैल जाती है।

फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने भारत में होने वाले आगामी चुनावों को अपनी कंपनी के लिए ‘रियल टेस्ट’ की संज्ञा दी है। साथ ही इस विशालकाय सोशल मीडिया कंपनी के लिए ब्राजील और यूरोपीय संघ (ईयू) के चुनावों को भी चुनौतीपूर्ण बताया। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि फर्जी यूजर्स के खिलाफ बड़े पैमाने पर की गई हालिया कार्रवाई के बाद उनकी कंपनी इन चुनावों में सही आकलन करेगी।

बता दें कि अमेरिका स्थित कंपनी को अपने करीब 8.7 करोड़ उपयोगकर्ताओं का डाटा कैंब्रिज एनालिटिका फर्म को लीक करने के विवाद में घिरा रहना पड़ा है। इस डाटा के कारण कई देशों में चुनावों को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया गया था। साथ ही फेसबुक प्लेटफार्म पर भारी संख्या में फेक न्यूज की भरमार होने के कारण भी उसे विवाद का सामना करना पड़ा था।

भारत सरकार ने भी फेसबुक को डाटा लीक के लिए दो कानूनी नोटिस भेजे थे। इन विवादों के बाद अपनी कंपनी की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे जुकरबर्ग ने निवेशकों से कहा कि अगले 18 महीनों में अमेरिका के बाहर ब्राजील, भारत और ईयू में अहम चुनाव हैं और ये फेसबुक की असली परीक्षा साबित होंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ले रहे मदद
जुकरबर्ग ने बताया कि वे झूठे खातों की रोकथाम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद ले रहे हैं। ये खाते बहुत सारा समस्या पैदा करने वाला कंटेंट पैदा कर रहे हैं। साथ ही बहुत सारे ऐसे पेजों को भी रोक रहे हैं, जो विज्ञापनों के जरिए झूठी खबरें फैला रहे हैं। बता दें कि पूरे विश्व में 2 अरब यूजर्स वाली फेसबुक को भारत में करीब 20 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं, जिस कारण इस पर छोटी सी खबर भी बहुत बड़ी आबादी तक तेजी से फैल जाती है।

Government Investment Schemes 2022: नए साल में यहां निवेश करके कमाएं ढ़ेर सारा पैसा

Government Investment Schemes 2022: नए साल में यहां निवेश करके कमाएं ढ़ेर सारा पैसा

आज के इस महंगाई के दौर में हर व्यक्ति पैसा बचाना चाहता है. इसके लिए हम सब अलग-अलग प्रकार के इन्वेस्टमेंट या निवेश प्लान का हिस्सा बनने की तलाश में रहते हैं. अगर मार्केट पर नजर डालें, तो आज हजारों इन्वेस्टमेंट प्लांस मौजूद हैं. हालांकि, इसकेसाथ ही, लोगों को निवेश के पैसे डूबने का खतरा भी सताता रहता है. ऐसे में अक्सर लोग इस बात को ध्यान में रखते हैं, कि इन्वेस्टमेंट प्लान ऐसा हो, जिसमें जोखिम एकदम शून्य के बराबर हो. आज हम इस लेख में कुछ ऐसी Government Investment Schemes की सूची लेकर आए हैं, जिनके साथ निवेशकों के लिए एकदम 0% रिस्क की संभावना रहती है. साथ ही, निवेशकों को उच्च रिटर्न भी मिलता है. आइए नज़र डालते हैं, ऐसी ही योजनाओं पर.

National Pension scheme (NPS)

इस Government Investment Scheme को केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2004 में लॉन्च किया गया था. इस स्कीम को लॉन्च के समय, सिर्फ़ सरकारी कर्मचारियो के लिए ही शुरू किया गया था. लेकिन वर्ष 2009 में, भारत सरकार ने इसे स्वरोजगार और निजी क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों सहित सभी के लिए खोल दिया. इस योजना के तहत, ग्राहक को उनके निवेश पर 10-15% ब्याज मिलेगा. 18 से 60 वर्ष की आयु तक भारतीय नागरिक, इस योजना की सदस्यता लेने के पात्र हैं. साथ ही, नियोक्ता भी इस योजना के तहत कर्मचारी की मासिक आय से एक समान राशि का योगदान कर सकते हैं.

Post Office Monthly Income Scheme (POMIS)

यह Government Investment Scheme, किसी भी पारंपरिक बचत खाते की तरह ही काम करती है. हालांकि, यह फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलती-जुलती है. व्यक्तिगत खाताधारक, कम से कम 1,000 रूपए और अधिकतम 4.5 लाख रूपए ही इस योजना में निवेश कर सकते हैं. खाताधारक को डाकघर में उसके बचत खाते में जमा ब्याज के रूप में मासिक निश्चित आय प्राप्त होगी. योजना के तहत दी जाने वाली ब्याज की वर्तमान दर 6.6% सालाना है, जो कि हर माह प्रदान की जाती है.

Public Provident Fund (PPF)

इस Government Investment Scheme को व्यक्ति अपने रिटायरमेंट का फंड इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है. PPF खाता खोलने के लिए कम से कम 500 रुपए का निवेश करना अनिवार्य होता है. खाते को मैच्योरिटी के बाद 5 साल के ब्लॉक के लिए बढ़ाया भी जा सकता है. यह खाते खोलने के तीसरे वित्तीय वर्ष से लेकर छठे वित्तीय वर्ष तक लोन लेने की सुविधा भी उपलब्ध होती है. केंद्र सरकार की तरफ़ से इस योजना को मुख्य रूप से उन लोगों के लिए शुरु किया गया था, जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और पेंशन योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं.

National Savings Certificate (NSC)

यह Government Investment Schemes निश्चित आय निवेश योजना है, जिसे भारत में किसी भी नजदीकी डाक घर में खोला जा सकता है. इस योजना में कम से कम 1000 रुपए की राशि निवेश की जाती है. यह योजना कर-लाभ वाले बचत बांड के तौर पर जानी जाती है, जो ग्राहकों को टैक्स से पैसे बचाने के साथ-साथ निवेश करने के लिए भी प्रोत्साहित करती है.

Sovereign Gold Bond (SGB)

यह Government Investment Scheme, ​​भारत सरकार की ओर से RBI द्वारा गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत 2015 में शुरू की गई एक निवेश योजना है. हालांकि, यह बॉन्ड असली सोने के स्थान पर इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं. निवेशक, नकद राशि देकर इस योजना से जुड़ते हैं और रिटर्न में नकद राशि प्राप्त करते हैं. योजना के तहत, भुगतान किए गए ब्याज की दर 2.5% प्रति वर्ष है और ब्याज राशि 6 महीने के बाद ग्राहक के खाते में जमा की जाती है. वर्ष 2022 में SGB 10-14 जनवरी के बीच जारी किया जाएगा.

राहुल यादव : क्या आप जानते हैं 24 साल के इस सीइओ की असली और पूरी कहानी?

इस्तीफा विवाद के कारण हाउसिंग डॉट कॉम के 24 वर्षीय सीइओ भारतीय मीडिया की पिछले दो-तीन दिनों से सुर्खी में बने हुए हैं. बिजनेस चैनलों, बिजनेस अखबारों व वेबसाइटों के लिए राहुल का इस्तीफा और फिर नाटकीय ढंग से उसे वापस ले लेना अहम खबर है. हर किसी ने इसे प्रमुखता से कवर किया और उसका फॉलोअप भी कर रहे हैं.

दरअसल, राहुल ने कुछ दिन पहले खुद की स्थापित कंपनी के सीइओ पद से इस्तीफा के लिए बोर्ड मेंबर्स व निवेशकों को मेल लिखा था. इस मेल में उनके द्वारा प्रयोग किये गये कडे और आपत्तिजनक शब्दों पर ही विवाद गहराया था. दरअसल, ऐसी स्थिति महज दो साल में 1500 करोड रुपये बाजार वाली कंपनी बन जाने वाली हाउसिंग डॉट कॉम के निवेशकों से उनका रिश्ता बिगडने के कारण हुआ. इस कंपनी में जापान की सॉफ्ट बैंक सहित कई बडी वेंचर कैपिटल कंपनियों ने निवेश कर रखा है.

सूत्रों की मानें तो राहुल यादव का विवाद सिक्योआ कैपिटल के एमडी शैलेंद्र सिंह से हुआ था. राहुल के स्ट्रेटजी प्लान से असंतुष्ट निवेशक व बोर्ड मेंबर उन्हें पद से हटाने पर विचार कर रहे थे. ज्यादातर इन्वेस्टर चाहते थे कि कंपनी के को फाउंडर आदित्य शर्मा को यह जगह अब दी जानी चाहिए. बहरहाल, विवादों के कारण चर्चा में आये राहुल यादव व उनके खास सहयोगी आदित्य शर्मा, जो उनकी ही उम्र के हैं कि शून्य से शिखर छूने की कहानी जानना बहुत दिलचस्प है. आइए जानते हैं इस 24 वर्षीय उद्यमी की पूरी कहानी.

राहुल यादव राजस्थान के अलवर के रहने वाले हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, जब वे दसवीं कक्षा में पढते थे, तो 20वें नंबर पर अपनी कक्षा में आये थे, जबकि इस कक्षा में मात्र 30 ही छात्र थे. पर, जब वे 12वीं की कक्षा में थे तो 75 प्रतिशत अंक लाया था और राजस्थान में वे फिजिक्स, केमेस्ट्री एवं मैथ्स स्ट्रीम में वे टॉपर हुए थे, जिसके बाद उन्हें आइआइटी प्रवेश परीक्षा के लिए स्कॉलरशिप मिली थी. बाद में उनका चयन भी आइआइटी, मुंबई के लिए हो गया.

राहुल यादव जब आइआइटी में पढ रहे थे तो वे सेंकेड इयर में अपनी कक्षा के छात्रों के प्रतिनिधि चुने गये और सीनियर कक्षा में पहुंचने के बाद छात्र संघ के सचिव बने. दिलचस्प बात यह कि आइआइटी के दिनों में चुनाव जीतने के लिए उन्होंने जो टेक्नोक्रेटिक आइडिया इस्तेमाल किया, वहीं बाद के दिनों में उनके स्टार्टअप का आधार बना. उन्होंने छात्रों से अपनी चुनावी घोषणा में वादा किया कि वे उनके लिए पिछले सालों की परीक्षाओं का एक कोश्चन बैंक बनायेंगे. उन्होंने ऑनलाइन बैंक बनाया भी, जिसका नाम था एक्जामबाबा डॉट कॉम.

आइआइटी में पढाई के बाद राहुल यादव व उनके दोस्त आदित्य शर्मा ने देखा कि उनके पहचान वालों व मित्रों को मुंबई में घर खोजने में काफी दिक्कत हो रही है. इस परेशानी से इन्हें भी दो चार होना पडा. ऐसे में घर खोजने के लिए एक ऑनलाइन स्टॉर्टअप का आइडिया आया, जिन्हें इन्होंने हाउसिंग डॉट कॉम नाम दिया. यह जल्द ही लोकप्रिय हो गया और इसकी सफलता देख कई बडे देशी विदेशी इन्वेस्टर ने इसमें निवेश किया. 2012 निवेशकों के लिए असली परीक्षा में आइआइटी से निकलने के साथ ही उन्होंने कंपनी की स्थापना की थी.

भले ही फौरी तौर पर राहुल यादव विवादों में आये हों, पर उनकी क्षमता व प्रतिभा के बहुत सारे लोग कायल हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, अभी इस कंपनी की पकड मुंबई के ही सिर्फ दस प्रतिशत बाजार पर है, ऐसे में विस्तार के लिए अपार संभावना है. राहुल यादव की इस कंपनी में फिलहाल 2500 लोग काम करते हैं, जिनकी संख्या जल्द ही 4000 हो जायेगी. राहुल यादव व उनके साथी आदित्य शर्मा कंपनी को ग्लोबल ब्रांड बनाने की कोशिश में जुटे हैं. इसके लिए कंपनी का कार्यालय सन फ्रांसिस्को सहित अन्य जगहों पर खोलने की योजना है. फिलहाल इस कंपनी की वेबसाइट पर 11 मीलियन विजिटिर हर महीने आते हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कंपनी में निवेश करने वाले एक बडे निवेशक ने कहा कि मेरे पास राहुल यादव का मेल पांच बजे सुबह आया, जिससे उनकी काम के प्रति तत्परता का पता चलता है. उस निवेशक का कहना है कि हो सकता है कि मैं उनसे अतिप्रभावित हूं, लेकिन वे नये बनते भारत के प्रतीक हैं. राहुल के दोस्त व कंपनी के सह संस्थापक आदित्य शर्मा जम्मू के रहने वाले हैं, वे कंपनी के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर भी हैं. इन्होंने मुंबई के पवई इलाके में ही अपना कार्यालय खोल रखा है.अपना इस्तीफा वापस लेने पर अपनी कंपनी के लोगों को उन्होंने सोशल मीडिया पर दिलचस्प संदेश दिया : आइ एम स्टिल योन सीइओ. हेव फन!

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निवेशकों के लिए असली परीक्षा

लांच करने से पहले भारत को सुनिश्चित करना होगा मजबूत 5जी बुनियादी ढांचा

लांच करने से पहले भारत को सुनिश्चित करना होगा मजबूत 5जी बुनियादी ढांचा

लांच करने से पहले भारत को सुनिश्चित करना होगा मजबूत 5जी बुनियादी ढांचा

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत इस साल अक्टूबर से पहली बार 5जी सेवा लांच करने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में दूरसंचार उद्योग के लिए असली परीक्षा टावरों से लेकर रेडियो एक्सेस नेटवर्क तक एक निर्बाध एवं निरंतर अनुभव सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत 5जी बुनियादी ढांचा बनाने में है।

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को उम्मीद है कि बेहतर आवाज गुणवत्ता (वॉयस क्वालिटी) और हाई स्पीड डेटा के लिए दूरसंचार कंपनियां अगले दो वर्षों में 5जी और 4जी पर 2-3 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।

यह कार्य बहुत बड़ा है और निवेशकों के लिए असली परीक्षा इसमें सभी हितधारकों की समय पर भागीदारी की आवश्यकता है, ताकि देश के हर हिस्से में लोग समान स्तर की 5जी सेवाओं का आनंद उठा सकें।

कड़वी सच्चाई यह है कि आज भी देश में कई जगहों पर सिग्नल के लगातार कमजोर रहने के बीच वास्तविक 4जी अनुभव तक पहुंच नहीं है।

5जी रेडियो एक्सेस नेटवर्क, न्यू रेडियो (एनआर) मानक पर आधारित, क्षमता के नए स्तर, पीक डेटा दर और कम विलंबता प्रदान करता है - कई दसियों मेगाबिट प्रति सेकंड से दसियों हजार यूजर्स की डेटा दरों की पेशकश करने की क्षमता के साथ उसी समय।

एरिक्सन 5जी पेपर के अनुसार, ये नेटवर्क ऑपरेटरों को प्रौद्योगिकी और प्रदर्शन नेतृत्व प्रदर्शित करने में मदद करते हैं, लेकिन लागत-दक्षता के नए स्तर (स्पेक्ट्रम दक्षता और वर्तमान परिसंपत्तियों को साझा करने सहित) प्रदान करके लाभप्रद रूप से बढ़ती मोबाइल ट्रैफिक मांगों को पूरा करते हैं।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्च र प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (डीआईपीए) के महानिदेशक टी. आर. दुआ ने आईएएनएस को बताया कि प्रति टावर साइट की मौजूदा क्षमता 2जी/3जी/4जी सेवाओं के लिए लगभग 1 जीबीपीएस है।

दुआ ने आईएएनएस को बताया, एक बार 5जी शुरू हो जाने के बाद, प्रत्येक साइट के लिए आवश्यक क्षमता बढ़कर 10-20 जीबीपीएस हो जाएगी, जिसके लिए इन टावर साइटों पर तैनात प्रौद्योगिकी में मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता होगी।

चूंकि 5जी इन्फ्रास्ट्रक्च र एक घने नेटवर्क की गारंटी देता है, इसलिए किसी भी प्रकार के पायलट और रोलआउट किए जाने से पहले बुनियादी ढांचे की जरूरतों और पूर्वापेक्षाओं पर विचार करना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया, 5जी नेटवर्क सघनता में आवासीय और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर छोटे सेल बुनियादी ढांचे की तैनाती शामिल होगी। अत्यधिक आबादी वाले या घनी आबादी वाले क्षेत्र की सेवा के लिए, किसी भी उपलब्ध बुनियादी ढांचे के स्थान का लाभ उठाना महत्वपूर्ण है, जहां 5जी छोटा सेल या कम पावर बेस ट्रांसीवर स्टेशन (एलपीबीटीएस), जिसे जी-नोड-बी के रूप में काम करने के लिए जाना जाता है।

जी-नोड-बी एक तीसरी पीढ़ी की भागीदारी परियोजना (3जीपीपी) है - 5जी-एनआर बेस स्टेशन का अनुपालन। 3जीपीपी मानक संगठनों के लिए एक छत्र शब्द (अंब्रेला टर्म) है, जो विश्व स्तर पर मोबाइल दूरसंचार के लिए प्रोटोकॉल विकसित करता है।

5जी उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड (ईएमबीबी) सेवाओं को सक्षम करेगा और फाइबर-समतुल्य फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सेवाओं, बड़े पैमाने पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसे नए उपयोग के मामलों की एक विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से नई मूल्य वर्धित वायरलेस सेवाओं के लिए बड़ी संभावनाएं पैदा करेगा। - ऑटोमोटिव, विनिर्माण, ऊर्जा और उपयोगिताओं और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में नई एप्लिकेशंस को सक्षम करना।

रेडियो एक्सेस नेटवर्क (आरएएन) मानकों की पिछली पीढ़ियों के विपरीत, जिन्हें स्टैंड-अलोन नेटवर्क के रूप में तैनात किया गया था, 5जी एनआर को शुरू से ही मौजूदा 4जी एलटीई नेटवर्क के साथ पूरी तरह से इंटरवर्क करने के लिए डिजाइन किया गया है।

हालांकि यह यूजर्स के लिए उच्च स्तर की निरंतरता और निर्बाध अनुभव प्रदान करता है, यह मौजूदा सेवाओं के जोखिम को कम करने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाने की भी मांग करता है।

नितिन बंसल, एमडी, इंडिया हेड-नेटवर्क्‍स, मार्केट एरिया दक्षिण पूर्व एशिया, (ओशिनिया और भारत), एरिक्सन ने आईएएनएस को बताया, हमने हाल ही में दिखाया है कि कैसे 5जी निजी 5जी नेटवर्क का उपयोग करके उद्यमों निवेशकों के लिए असली परीक्षा को स्वचालित निर्माण में मदद कर सकता है। हाल ही में, भारती एयरटेल ने बॉश निर्माण सुविधा में गुणवत्ता सुधार और परिचालन दक्षता के लिए परीक्षण स्पेक्ट्रम का उपयोग करते हुए दो औद्योगिक ग्रेड उपयोग के मामलों का प्रदर्शन किया है।

बंसल ने कहा, दोनों उपयोग के मामलों में, 5जी तकनीक जैसे ईएमबीबी और अल्ट्रा-लो लेटेंसी कम्युनिकेशन ने स्वचालित संचालन का समर्थन किया, जिससे तेजी से स्केल अप और डाउनटाइम कम हुआ।

5जी की सहज शुरुआत सुनिश्चित करने के लिए, ऑपरेटरों को आगे देखने और परिनियोजन ²ष्टिकोण की पहचान करने की आवश्यकता है जो मौजूदा निवेश का सर्वोत्तम उपयोग करता है और अपनी स्वयं की व्यावसायिक रणनीतियों का सर्वोत्तम समर्थन करता है।

दुआ के अनुसार, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे सरकारी भवन, सड़क के खंभे और बस स्टॉप वेस्टिब्यूल आदि अक्सर उन जगहों पर स्थित होते हैं जो सार्वजनिक पहुंच के लिए आसानी से उपलब्ध होते हैं।

इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, यह कवरेज केवल तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जाता है और ओएफसी बैकहॉल के माध्यम से छोटे सेल कनेक्टिविटी के लिए बैकबोन नेटवर्क की तुलना में आवश्यक ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) कनेक्टिविटी है।

इसके अलावा, बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की श्रेणी-1 (आईपी-1) के दायरे में वृद्धि, करों और शुल्कों (संपत्ति कर और प्रशासन शुल्क) के युक्तिकरण, दूरसंचार बुनियादी ढांचे के प्रतिभूतिकरण, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और सरकारी भूमि/भवनों की उपलब्धता जैसे नीतिगत सुधारों से जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा। उद्योग के विशेषज्ञों ने कहा है कि एक सफल राष्ट्रव्यापी 5जी रोलआउट देने की अपनी खोज में दूरसंचार क्षेत्र को इससे काफी बढ़ावा मिलने वाला है।

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