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विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं

विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं
भारत आज़ादी की 75वीं जयंती मना रहा है. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह आयोजन एक भारत, श्रेष्ठ भारत के विज़न को मज़बूती देने वाला है, साथ ही यह तमिल जैसी प्राचीन भाषा के विकास में मदद पहुंचाने वाला है.

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विदेशी मुद्रा व्यापार के साथ शामिल घोटाले की खोज

जबकि विदेशी मुद्रा (विदेशी मुद्रा) निवेश एक वैध प्रयास है और घोटाला नहीं है, बहुत सारे घोटाले ट्रेडिंग फॉरेक्स के साथ जुड़े हुए हैं। कई उद्योगों के साथ, नए शिकारियों का लाभ उठाने के लिए बहुत सारे शिकारी वहां मौजूद हैं। नियामकों ने पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा को मजबूत किया है और बाजार में काफी सुधार हुआ है, जिससे इस तरह के घोटाले बढ़ते जा रहे हैं।

विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्राओं के जोड़े का व्यापार शामिल है उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति अमेरिकी डॉलर के लिए यूरो का आदान-प्रदान कर सकता है। 2019 के सितंबर में, 1 यूरो का मूल्य $ 1.09 से लेकर लगभग $ 1.12 तक था। तो, एक व्यापारी जिसने $ 112 के लिए 100 यूरो का आदान-प्रदान किया, जब डॉलर का मूल्य उच्च होता है, तो यूरो के लिए उन $ 112 का आदान-प्रदान करके लाभ कमा सकता है जब डॉलर का मूल्य प्रति यूरो $ 1.09 पर वापस गिरता है। इस तरह के लेन-देन का परिणाम 3% से कम का शुद्ध लाभ होगा, जो संभवतः दलाल के कमीशन द्वारा मिटा दिया जाएगा।

क्या एक घोटाले बनाता है?

विदेशी मुद्रा व्यापार पहली बार 1990 के दशक के अंत में खुदरा व्यापारियों के लिए उपलब्ध हो गया था। पहले कुछ वर्षों में रातोंरात दलालों के साथ सूखा पड़ा था जो बिना किसी सूचना के पॉप अप करने और फिर दुकान बंद करने के लिए लग रहे थे।

आम भाजक यह था कि ये दलाल गैर-पंजीकृत देशों में आधारित थे। जबकि कुछ संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए थे, बहुसंख्यक विदेशों में उत्पन्न हुए थे, जहां ब्रोकरेज स्थापित करने की एकमात्र आवश्यकता कुछ हजार डॉलर की फीस थी।

एक खराब-संचालित दलाली के बीच एक अलग अंतर मौजूद है, जो जरूरी नहीं कि एक घोटाला है, और एक धोखाधड़ी है। यहां तक ​​कि खराब रनिंग ब्रोकरेज खेल से बाहर ले जाने से पहले लंबे समय तक चला सकते हैं।

घोटाले के निवेशकों के कुछ सामान्य उदाहरणों में मंथन और दलालों को शामिल करना चाहिए जो केवल जोखिम को कम करते हैं। मंथन में ऐसे दलाल शामिल हैं जो कमीशन बनाने के एकमात्र उद्देश्य के लिए अनावश्यक ट्रेडों को निष्पादित करते हैं।

स्कैम होने से कैसे बचें

पहला कदम ब्रोकरेज के मुख्यालय के स्थान की जांच करना और शोध करना है कि यह व्यापार में कितना समय रहा है और उन्हें कहां विनियमित किया गया है। अधिक बेहतर।

यदि आपको लगता है कि आपको घोटाला किया जा रहा है, तो अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन से संपर्क करें।

दलाली के साथ निवेश करने से पहले, यह पता लगाने का सरल कार्य कि आपको किसे कॉल करना चाहिए, यदि आपको लगता है कि आपको घोटाला किया गया है, तो आप सड़क पर बहुत सारे संभावित दिल का दर्द बचा सकते हैं। यदि आप किसी को कॉल करने के लिए नहीं पा सकते हैं क्योंकि ब्रोकरेज एक गैर-विनियमित क्षेत्राधिकार में स्थित है, तो यह आमतौर पर एक लाल झंडा और एक संकेत है जो अधिक विनियमित विकल्प खोजने के लिए सबसे अच्छा है।

जन्मदिन पर सुष्मिता की बेटी ने लिखा भावुक नोट, भाभी ने भी दीं शुभकामनाएं

जन्मदिन पर सुष्मिता की बेटी ने लिखा भावुक नोट, भाभी ने भी दीं शुभकामनाएं

अपने पोस्ट में रेनी ने अपनी माँ सुष्मिता सेन को जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा-मेरी लाइफलाइन को जन्मदिन मुबारक हो। आप अपने जीवन के सबसे अच्छे फेस में प्रवेश कर रही हैं, इसके लिए मैं बस आपको धन्यवाद कहना चाहती हूं। आपके पास बहुत बड़ा दिल है। आपकी बेटी होना मेरे विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं लिए भगवान का सबसे बड़ा आशीर्वाद है। आपने एक विरासत बनाई है, जो बेजोड़ है और मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मैं हर रोज इसकी गवाह बनती हूं। आप जिस भी चीज को छूती हैं, वह सोना बन जाती है और ऐसा इसलिए है, क्योंकि आप हर चीज को इतने प्यार, समर्पण और कड़ी मेहनत से करती हैं। आप खुद ही अभिनय में एक संस्था हैं। इतनी ईमानदारी से आपने अपना जीवन जिया है कि मुझे खुद इस बात पर भरोसा नहीं होता है कि क्या मैं कभी आपकी तरह बन पाऊंगी।आप जहां भी रहती हैं वह जगह घर बन जाती है। अलीसा और मुझे मजबूत, स्वतंत्र महिला बनाने और जमीन से जोड़े रखने के लिए धन्यवाद। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं मां, आपके 47वें साल में आपका स्वागत है। जन्मदिन मुबारक हो मां।

नोटबंदी का निर्णय आरबीआई के साथ काफ़ी चर्चा और तैयारी के साथ लिया गया था: केंद्र

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इस बारे केंद्र सरकार ने हलफ़नामा पेश करते हुए कहा है कि नोटबंदी के बारे में उसने फरवरी 2016 में आरबीआई के साथ विचार-विमर्श शुरू किया था और उसी के परामर्श पर यह फैसला लिया गया. The post नोटबंदी का निर्णय आरबीआई के साथ काफ़ी चर्चा और तैयारी के साथ लिया गया था: केंद्र appeared first on The Wire - Hindi.

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इस बारे केंद्र सरकार ने हलफ़नामा पेश करते हुए कहा है कि नोटबंदी के बारे में उसने फरवरी 2016 में आरबीआई के साथ विचार-विमर्श शुरू किया था और उसी के परामर्श पर यह फैसला लिया गया.

नवंबर 2016 में राजस्थान में बैंक के बाहर कतार में लगे नागरिक. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि 2016 में की गई नोटबंदी एक बहुत ही सोच-विचार करके लिए गया फैसला था और यह जाली नोट, आतंकवाद के वित्तपोषण, काले धन और कर चोरी जैसी समस्याओं से निपटने की बड़ी रणनीति का हिस्सा था.

केंद्र ने नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में दायर हलफनामे में यह बात कही है.

काशी और तमिलनाडु में क्या संबंध है?

काशी और तमिलनाडु के आपसी संबंधों के बारे में जानने के लिए हमने भूरातत्ववेत्ता पद्मावती से बात की. उनके मुताबिक दोनों जगहों के बीच दसवीं शताब्दी से ही संबंध रहे हैं.

पद्मावती ने बताया, “हमारे पास चोल काल के समय के शिलालेख हैं जिनमें वाराणसी का ज़िक्र है. तमिलनाडु में कई जगहों पर काशी विश्वनाथ और विशालाक्षी मंदिर मौजूद हैं. तमिलनाडु में काशी नाम का शहर भी है."

वो कहती हैं, "काशी में अब भी तमिल लोग रहते हैं और वे काशी विश्वनाथ मंदिर से भी जुड़े हुए हैं. आज भी काशी के लोग धार्मिक कारणों से रामेश्वरम जाते हैं और दक्षिण भारतीय लोग काशी आते हैं."

"यह प्राचीन काल से चला आ रहा है. 17वीं शताब्दी में शैव कवि कुमारागुरूपरार तमिलनाडु से काशी गए और वहां मठ स्थापित किया."

वो बताती हैं, "यह मठ बाद में थानजावुर ज़िले में आ गए लेकिन लोग उसे आज भी काशी मठ ही कहते हैं.”

आयोजन का विरोध क्यों हो रहा है?

प्रोफेसर अरुनन इस समय में काशी तमिल संगम के आयोजन की आलोचना करते हैं. उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन अभी थमा नहीं है. ऐसे में बीजेपी ऐसी छवि बनाना चाहती है कि वह तमिल को सेलिब्रेट कर रही है. भारतीय भाषा समिति का काम भारतीय भाषाओं का विकास करना है. अगर यह समिति तमिल भाषा और उसकी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहती तो इसका आयोजन तमिलनाडु में किया जाता.”

“इसका आयोजन वाराणसी में क्यों हो रहा है, जिसे संस्कृत का मठ कहा जाता है. हिंदुत्व के मुख्यालय के तौर पर जाने जाने वाले वाराणसी के बदले तमिलनाडु में इसका आयोजन होता तो हमें ज़्यादा फ़ायदा होता. तमिल भाषा और उसकी संस्कृति के महत्व को बताने विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं के लिए वाराणसी का चुनाव किया जा रहा है, यह पूरी तरह से बीजेपी के राजनीतिक उद्देश्य के चलते किया गया है.”

अरुनन कहते हैं, “इसका आयोजन भारतीय आयकर दाताओं के पैसे से हो रहा है. इसका आयोजन हिंदू शहर समझे जाने वाले वाराणसी में हो रहा है. अगर उन्हें ऐसा आयोजन करना ही था तो उन्हें तमिलनाडु और वेटिकन सिटी के रिश्तों के बारे में पता लगाना चाहिए या फिर तमिलनाडु और मक्का के संबंधों की पड़ताल करनी चाहिए? क्या हमें इन शहरों पर तमिल असर के बारे में नहीं जानना चाहिए? अगर वे तमिल की अहमियत पर बात करना चाहते हैं तो केंद्र सरकार कीलाडी और आदिचनल्लूर में हुई खुदाई की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और घोषणा करनी चाहिए कि भारतीय सभ्यता हड़प्पा, मोहनजोदड़ो में शुरू ना होकर तमिलनाडु में शुरू हुई थी.”

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का क्या कहना है?

शिक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि काशी तमिल संगम में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की भूमिका होगी. यह भूमिका क्या होगी, इसके बारे में हमने भारतीय भाषा विभाग के प्रोफेसरों से बात की.

नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त के साथ एक प्रोफेसर ने बताया, “अभी तक हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. हमारी भूमिका क्या होगी, इसके बारे में हम नहीं जानते हैं. हमें एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम के आयोजन की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली है. हम लोगों से कैसी भूमिका अपेक्षित है, ये हम नहीं जानते हैं. यह पूरी तरह से सरकारी आयोजन नहीं है. बल्कि यह राजनीतिक कार्यक्रम ज़्यादा है.”

“बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में अब तक इसको लेकर कोई पहल नहीं हुई है. इसका उद्घाटन कार्यक्रम आईआईटी चेन्नई में होगा. आईआईटी प्रशासन ने संगम की वेबसाइट तैयार करायी है. उन लोगों ने 12 विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं समिति बनाई है, उसके सदस्य चुने हैं. इन सबमें हमलोगों से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया है.”

क्या यह एक राजनीतिक कार्यक्रम है?

इस कार्यक्रम के आयोजन और हो रही आलोचना के मुद्दे पर बीबीसी तमिल ने तमिलनाडु में बीजेपी प्रवक्ता नारायण तिरूपति से बात की. उन्होंने कहा, “आज़ादी के अमृत महोत्सव के मौके पर हम लोगों की एकता को प्रदर्शित करने के लिए यह आयोजन हो रहा है. यह दर्शाता है कि हम भले अलग अलग भाषा बोलते हों, लेकिन हम भारतीय हैं.”

उन्होंने यह भी बताया, “2500 भागीदार इसमें एकता के दूत के तौर पर शामिल होंगे. काशी के लोगों को तमिल संस्कृति की महानता का पता चलेगा. तमिलनाडु के लोग सीधे काशी जा रहे हैं तो उन्हें प्रत्यक्ष तौर पर जानकारी मिलेगी. दोनों क्षेत्रों के लोग एक दूसरे के क़रीब आएंगे, एकता अनुभव करेंगे. इस आयोजन से तमिल भाषा और संस्कृति की महानता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.”

लेकिन इसका आयोजन काशी में ही क्यों हो रहा है? इस सवाल के जवाब में बीजेपी प्रवक्ता नारायण तिरूपति ने कहा, “हम युवा पीढ़ी को काशी और तमिलनाडु के संबंधों विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं के बारे में बताना चाहते हैं. तमिलनाडु के लोग खुद को काशी के क़रीब पाते रहे हैं. हमलोग कोई नयी बात नहीं कर रहे हैं. धार्मिक लोग ही नहीं नास्तिक पेरियार ने भी कुछ महीने काशी में बिताए थे. जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्हें यह मालूम होना चाहिए. हम लोग राजनीतिक उद्देश्य वाले नहीं हैं, डीएमके पार्टी भाषा के आधार पर राजनीति करती है.”

काशी और तमिलनाडु में क्या संबंध है?

काशी और तमिलनाडु के आपसी संबंधों के बारे में जानने के लिए हमने भूरातत्ववेत्ता पद्मावती से बात की. उनके मुताबिक दोनों जगहों के बीच दसवीं शताब्दी से ही संबंध रहे हैं.

पद्मावती ने बताया, “हमारे पास चोल काल के समय के शिलालेख हैं जिनमें वाराणसी का ज़िक्र है. तमिलनाडु में कई जगहों पर काशी विश्वनाथ और विशालाक्षी मंदिर मौजूद हैं. तमिलनाडु में काशी नाम का शहर भी है."

वो कहती हैं, "काशी में अब भी तमिल लोग रहते हैं और वे काशी विश्वनाथ मंदिर से भी जुड़े हुए हैं. आज भी काशी के लोग धार्मिक कारणों से रामेश्वरम जाते हैं और दक्षिण भारतीय लोग काशी आते हैं."

"यह प्राचीन काल से चला आ रहा है. 17वीं शताब्दी में शैव कवि कुमारागुरूपरार तमिलनाडु से काशी गए और वहां मठ स्थापित किया."

वो बताती हैं, "यह मठ बाद में थानजावुर ज़िले में आ गए लेकिन लोग उसे आज भी काशी मठ ही कहते हैं.”

आयोजन का विरोध क्यों हो रहा है?

प्रोफेसर अरुनन इस समय में काशी तमिल संगम के आयोजन की आलोचना करते हैं. उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन अभी थमा नहीं है. ऐसे में बीजेपी ऐसी छवि बनाना चाहती है कि वह तमिल को सेलिब्रेट कर रही है. भारतीय भाषा समिति का काम भारतीय भाषाओं का विकास करना है. अगर यह समिति तमिल भाषा और उसकी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहती तो इसका आयोजन तमिलनाडु में किया जाता.”

“इसका आयोजन वाराणसी में क्यों हो रहा है, जिसे संस्कृत का मठ कहा जाता है. हिंदुत्व के मुख्यालय के तौर पर जाने जाने वाले वाराणसी के बदले तमिलनाडु में इसका आयोजन होता तो हमें ज़्यादा फ़ायदा होता. तमिल भाषा और उसकी संस्कृति के महत्व को बताने के लिए वाराणसी का चुनाव किया जा रहा है, यह पूरी तरह से बीजेपी के राजनीतिक उद्देश्य के चलते किया गया है.”

अरुनन कहते हैं, “इसका आयोजन भारतीय आयकर दाताओं के पैसे से हो रहा है. इसका आयोजन हिंदू शहर समझे जाने वाले वाराणसी में हो रहा है. अगर उन्हें ऐसा आयोजन करना ही था तो उन्हें तमिलनाडु और वेटिकन सिटी के रिश्तों के बारे में पता लगाना चाहिए या फिर तमिलनाडु और मक्का के संबंधों की पड़ताल करनी चाहिए? क्या हमें इन शहरों पर तमिल असर के बारे में नहीं जानना चाहिए? अगर वे तमिल की अहमियत पर बात करना चाहते हैं तो केंद्र सरकार कीलाडी और आदिचनल्लूर में हुई खुदाई की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं घोषणा करनी चाहिए कि भारतीय सभ्यता हड़प्पा, मोहनजोदड़ो में शुरू ना होकर तमिलनाडु में शुरू हुई थी.”

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का क्या कहना है?

शिक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि काशी तमिल संगम में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की भूमिका होगी. यह भूमिका क्या होगी, इसके बारे में हमने भारतीय भाषा विभाग के प्रोफेसरों से बात की.

नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त के साथ एक प्रोफेसर ने बताया, “अभी तक हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. हमारी भूमिका क्या होगी, इसके बारे में हम नहीं जानते हैं. हमें एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम के आयोजन की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली है. हम लोगों से कैसी भूमिका अपेक्षित है, ये हम नहीं जानते हैं. यह पूरी तरह से सरकारी आयोजन नहीं है. बल्कि यह राजनीतिक कार्यक्रम ज़्यादा है.”

“बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में अब तक इसको लेकर कोई पहल नहीं हुई है. इसका उद्घाटन कार्यक्रम आईआईटी चेन्नई में होगा. आईआईटी प्रशासन ने संगम की वेबसाइट तैयार करायी है. उन लोगों ने 12 समिति बनाई है, उसके सदस्य चुने हैं. इन सबमें हमलोगों से कोई विचार विमर्श नहीं किया गया है.”

क्या यह एक राजनीतिक कार्यक्रम है?

इस कार्यक्रम के आयोजन और हो रही आलोचना के मुद्दे पर बीबीसी तमिल ने तमिलनाडु में बीजेपी प्रवक्ता नारायण तिरूपति से बात की. उन्होंने कहा, “आज़ादी के अमृत महोत्सव के मौके पर हम लोगों की एकता को प्रदर्शित करने के लिए यह विदेशी मुद्रा व्यापार में मुद्रा जोड़े क्या हैं आयोजन हो रहा है. यह दर्शाता है कि हम भले अलग अलग भाषा बोलते हों, लेकिन हम भारतीय हैं.”

उन्होंने यह भी बताया, “2500 भागीदार इसमें एकता के दूत के तौर पर शामिल होंगे. काशी के लोगों को तमिल संस्कृति की महानता का पता चलेगा. तमिलनाडु के लोग सीधे काशी जा रहे हैं तो उन्हें प्रत्यक्ष तौर पर जानकारी मिलेगी. दोनों क्षेत्रों के लोग एक दूसरे के क़रीब आएंगे, एकता अनुभव करेंगे. इस आयोजन से तमिल भाषा और संस्कृति की महानता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.”

लेकिन इसका आयोजन काशी में ही क्यों हो रहा है? इस सवाल के जवाब में बीजेपी प्रवक्ता नारायण तिरूपति ने कहा, “हम युवा पीढ़ी को काशी और तमिलनाडु के संबंधों के बारे में बताना चाहते हैं. तमिलनाडु के लोग खुद को काशी के क़रीब पाते रहे हैं. हमलोग कोई नयी बात नहीं कर रहे हैं. धार्मिक लोग ही नहीं नास्तिक पेरियार ने भी कुछ महीने काशी में बिताए थे. जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्हें यह मालूम होना चाहिए. हम लोग राजनीतिक उद्देश्य वाले नहीं हैं, डीएमके पार्टी भाषा के आधार पर राजनीति करती है.”

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