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डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है

डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है
Zee News Desk | Updated: Mar 07, 2022, 11:57 AM IST

डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है

OKX एक सेशेल्स स्थित क्रिप्टोकरेंसी सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज (CEX) और वॉलेट प्लेटफॉर्म है जो दुनिया भर में लाखों ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है। यह एक्सचेंज बेसिक ट्रेडिंग ऑफर करता है जिसमें शामिल हैं- स्पॉट और सरल ऑप्शंस, और मार्जिन, फ्यूचर्स, परपेचुअल स्वैप और स्वैप सहित डेरिवेटिव। अन्य उत्पादों में शामिल हैं: ट्रेडिंग बॉट, ब्लॉक ट्रेडिंग, OKX Earn (सेविंग्स, स्टेबलकॉइन, DeFi, स्टेकिंग, ETH 2.0 और अन्य), क्रिप्टो ऋण और Jumpstart, एक्सचेंज का लॉन्चपैड।

OKX वॉलेट "वेब 3 के लिए पोर्टल" होने का दावा करता है, जो क्रिप्टो हॉट वॉलेट, डिसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज (DEX), NFT मार्केटप्लेस और डिसेंट्रलाइज्ड एप्लिकेशन (DApps) की पेशकश करता है। वॉलेट 30 से अधिक नेटवर्क को सपोर्ट करता है, जिसमें Bitcoin, Ethereum, BNB Chain, Solana, Polygon, Avalanche, Fantom और अन्य जैसे प्रमुख ब्लॉकचेन शामिल हैं।

OKX का अपना नेटिव ब्लॉकचेन — OKX चेन और नेटिव टोकन — OKB भी है, डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है जो बिल्डर्स और प्रोजेक्ट्स को OKX ओरेकल एवं अन्य जैसे बुनियादी ढांचे का उपयोग करने के लिए DApp और डेवलपर्स को काम में लाने की सुविधा देता है।

जनवरी 2022 में, OKEx को एक नई ब्रांडिंग और रोडमैप के साथ OKX के रूप में रीब्रांड किया गया।

OKX के संस्थापक कौन हैं?

OKX (पूर्व में OKEx) OK Group के स्वामित्व वाले OKCoin की सहायक कंपनी है।

इस कंपनी की स्थापना मिंगसिंग "स्टार" जू (Xu) ने 2013 में चीन में की थी। जू एक चीनी उद्यमी हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी बीजिंग से एप्लाइड फिजिक्स में बैचलर्स डिग्री हासिल की है। स्टार जू OK Group के सीईओ हैं।

OKX के वर्तमान सीईओ जे हाओ हैं।

OKX कब लॉन्च हुआ?

यह एक्सचेंज, जिसे पहले OKEX के नाम से जाना जाता था, 2017 में लॉन्च किया गया था।

OKX कहां स्थित है?

इस कंपनी का मुख्यालय सेशेल्स में है।

OKX प्रतिबंधित देश

यह प्रोजेक्ट 200 से अधिक देशों में समर्थित है। हालांकि, यूनाइटेड स्टेट्स के निवासियों के पास प्लेटफॉर्म की सेवाओं तक एक्सेस नहीं है।

OKX पर कौन से कॉइन सपोर्टेड हैं?

यह एक्सचेंज 350 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी को सूचीबद्ध करता है और 500 से अधिक ट्रेडिंग पेयर्स को सपोर्ट करता है। यह प्लेटफॉर्म प्रमुख टोकनों को सूचीबद्ध करता है जिनमें शामिल हैं: BTC, ETH, OKB, AAVE, SOL, MATIC, XRP, DOGE, SHIB, और DOT.

OKX फीस कितनी है?

फीस संरचना मार्केट टेकर और मेकर मॉडल पर आधारित है। इस प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग फीस 0.10% से शुरू होती है और ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने पर घट जाती है। नियमित यूजर्स के लिए, फीस OKX इकोसिस्टम में OKB (मूल मुद्रा) की संख्या पर निर्भर करती है, जबकि एडवांस यूजर्स के लिए, फीस उनके 30-दिन के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर आधारित होती है।

क्या OKX पर लीवरेज या मार्जिन ट्रेडिंग उपयोग करना संभव है?

OKX 10X तक लीवरेज के साथ मार्जिन ट्रेडिंग ऑफर करता है। डेरिवेटिव के लिए, OKX 125X तक लीवरेज के साथ फ्यूचर ट्रेडिंग और परपेचुअल स्वैप भी ऑफर करता है। ट्रेडर्स क्रिप्टो ऑप्शंस के माध्यम से भी लीवरेज ले सकते हैं, जिसमें BTC, ETH और अन्य शामिल हैं।

TATA Coin ने महज 24 घंटे में दिया 1200% का रिटर्न! कुबेर का खजाना है यह क्रिप्टोकरेंसी, जानिए क्यों?

Cryptocurrency: बिकवाली के इस दौर में TATA Coin पिछले 24 घंटे में 1200 फीसदी की मजबूती के साथ वर्तमान में 0.09515 डॉलर पर ट्रेड कर रही है. टाटा कॉइन (TATA Coin) का उद्देश्य डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस को सुरक्षित बनाना है और दुनिया भर के निवेशकों के साथ-साथ मल्टीनेशनल कंपनियों और संस्थानों को बेहतरीन सुरक्षित पेमेंट सिस्टम उपलब्ध कराना है.

TATA Coin ने महज 24 घंटे में दिया 1200% का रिटर्न! कुबेर का खजाना है यह क्रिप्टोकरेंसी, जानिए क्यों?

Zee News Desk

Zee News Desk | Updated: Mar 07, 2022, 11:57 AM IST

  • टाटा कॉइन ने 24 घंटे में दिया 1200% का रिटर्न
  • यहां जानिए क्यों खास है यह क्रिप्टोकरेंस
  • डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है उद्देश्य

नई दिल्ली: TATA Coin: इस समय शेयर बाजार में बिकवाली का माहौल है. ऐसे में हर कोई ऐसी जगह निवेश करना चाहता है जहां सुरक्षित और बढ़िया रिटर्न मिले. एक डिसेंट्रलाइज्ड क्रिप्टोकरेंसी (Decentralised Cryptocurrency) में पिछले 24 घंटों में 1,200 फीसदी की मजबूती देखी गई है. कॉइन मार्केट कैप से मिले डाटा से यह जानकारी मिली है.

पिछले कुछ महीनों में क्रिप्टोकरेंसी का जबरदस्त बाजार बना है. टाटा कॉइन इस समय 1200 % की मजबूती के साथ 0.09515 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है. वहीं, टाटा कॉइन की पूरी तरह डायल्यूटेड मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalisation) 8,56,355 डॉलर है.

क्या है इस खास क्रिप्टो का उद्देश्य

टाटा कॉइन (TATA डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है Coin) का उद्देश्य डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस को सुरक्षित बनाना है और दुनिया भर के निवेशकों के साथ-साथ मल्टीनेशनल कंपनियों और संस्थानों को बेहतरीन सुरक्षित पेमेंट सिस्टम उपलब्ध कराना है. इससे उन्हें ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी (Blockchain Technology) का इस्तेमाल करते हुए आसान और सुरक्षित डिजिटल ट्रांजेक्शन की सुविधा मिलेगी. इससे लोगों का निवेश सुरक्षित रहेगा.

कम्युनिटी आधारित है यह क्रिप्टोकरेंसी

क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित ग्लोबल डिजिटल करेंसी और दुनिया भर में पेमेंट के तरीके के रूप में इस्तेमाल होने का लक्ष्य भी बनाया जा रहा है. यह एक पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड क्रिप्टोकरेंसी (decentralised Cryptocurrency) है. TATA Coin को पूरी तरह कम्युनिटी पर आधारित बनाया गया है.

क्या है इसकी खासियत?

यह क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड पीयर टू पीयर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है जो सरकार या फाइनेंशियल सिस्टम जैसी किसी केंद्रीय अथॉरिटी पर निर्भर नहीं है.
- TATA Coin दुनिया, मर्चेंट्स और यूजर्स को कम फीस के साथ अच्छा रिटर्न देने का दावा करती है.
- Tata Coin को 'You' के स्वामित्व वाली दुनिया की पहली डिजिटल मुद्रा के रूप में लॉन्च किया डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है गया है.
- यह डिजिटल करेंसी किसी व्यक्ति, संगठन, संस्था या समूह के स्वामित्व या कंट्रोल में नहीं रहेगी.
- बाइनैंस स्मार्ट चैनल पर इसके सिर्फ 90 लाख कॉइन बनाए जाएंगे.
- TATA Coin जमीन या गोल्ड की तरह एक मजबूत एसेट है, जो लोगों को लंबे समय तक डिजिटल रूप में वैल्यू को स्टोर करने का अवसर डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है देती है.

जानिए क्यों किया गया है AIIMS का सर्वर हैक और क्रिप्टोकरेंसी में क्यों की गयी 200 करोड़ रुपए की मांग

AIIMS

पिछले 6 दिन से दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का सर्वर डाउन है और अभी सातवें डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है दिन भी सर्वर के डाउन होने की ठप होने की खबर है. एम्स का सर्वर डाउन होने की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अब सभी काम यहां पर मैन्युअल तरीके से हो रहा है. जहां इंडिया कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन), दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय इस मामले की जांच में लगे हुए हैं. वहीं इस बीच AIIMS का सर्वर डाउन होने की वजह का पता लग गया है.

जानिए क्या है AIIMS का सर्वर डाउन होने की वजह

AIIMS का सर्वर को हाईजैक किया गया है और हैकर्स ने क्रिप्टोकरेंसी डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है में 200 करोड़ रुपए की मांग की है. वहीं हैकर्स ने यह मांग मेल के जरिए एम्स को भेजी है साथ ही धमकी दी है कि उनकी मांग को पूरा न करने पर वो सर्वर को ठीक नहीं करेंगे और सर्वर डाउन ही रहेगा. वहीं इस मेल के आने के बाद दिल्ली पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है. पुलिस कड़ी से कड़ी जोड़कर हैकर्स के कॉलर तक पहुंचने में लगी है साथ ही पुलिस धमकी भरे मेल का आईपी एड्रेस भी ट्रैक करने की कोशिश कर रही है.

AIIMS सर्वर का क्रिप्टो से कनेक्शन

रिपोर्ट के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) के नेटवर्क को भी हैक कर करोड़ों रुपए का गबन किया गया है. वहीं इस वजह से क्रिप्टोकरेंसी के जरिए 200 करोड़ रुपए की मांग की है. जानकारी के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल करेंसी (virtual currency) को डिजिटल करेंसी (Digital currency) कहा जाता है, जिसे एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी की सहायता से जनरेट किया जाता है और उसके बाद रेगुलेट भी किया जाता है. इस तरह की करेंसी को दुनिया के किसी भी केंद्रीय बैंक की ओर से मान्यता नहीं मिली हुई है ना ही यह किसी केंद्रीय बैंक (Central bank) की ओर से रेगुलेट होती है. इस तरह की करेंसी पर किसी भी देश की मुहर भी नहीं लगी होती है. जिसकी वजह से ये पैसा डिसेंट्रलाइज्ड करेंसी की तरह काम करेगा. वहीं इस करेंसी को यूज करने वाला पूरी तरह से गुमनाम या डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है फिर छिपा हुआ होता है. वहीं इसका दूसरा फायदा ये है कि बिटकॉइन और इसकी जैसी दूसरी करेंसी को वर्चुअल वॉलेट्स (virtual wallets) में रखा जा सकता है. जिसकी पहचान सिर्फ नंबर से ही होती है.

AIIMS का डाटा क्यों है कीमती

ई-हॉस्पिटल सर्वर डाउन (E- Hospital Server) होने के कारण ओपीडी (OPD) सहित कई सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं. वहीं इस हमले से करीब 2 से 3 करोड़ मरीजो को दिक्कत तो हो ही रही है साथ ही कई VVIP का डाटा भी दाव पर है जिसके लीक होने की संभावना है और इसका डाटा का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा सकता है.

Reeta Tiwari

Reeta Tiwari

रीटा एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रीटा पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रीटा नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

क्या है डिजिटल रुपया और क्रिप्टोकरेंसी से कैसे है अलग? जानें हर डिटेल

डिंपल अलावाधी

RBI Digital Rupee: सीबीडीसी के लॉन्च के लिए, आरबीआई अधिनियम, फेमा, आईटी अधिनियम, आदि में बदलाव करना होगा।

know what is Digital Rupee and How is CBDC different from Cryptocurrency

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में डिजिटल करेंसी को लेकर बड़ा ऐलान किया है।
  • जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक डिजिटल रुपया जारी करेगा।
  • यह ब्लॉकचेन समेत अन्य टेक्नोलॉजी पर आधारित डिजिटली करेंसी होगी।

RBI Digital Rupee: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) द्वारा केंद्रीय बजट 2022 (Budget 2022) में की गई घोषणाओं में से एक प्रमुख घोषणा केंद्रीय बैंक समर्थित डिजिटल मुद्रा (CBDC) की थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाने वाला डिजिटल रुपया (Digital Rupee) नए वित्तीय वर्ष में शुरू किया जाएगा।

भारत में पहली बार जारी होने वाले डिजिटल रुपए ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वास्तव में एक डिजिटल रुपया क्या होगा और यह कैसे डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है काम करेगा। आसान शब्दों में समझें, तो CBDC किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा डिजिटल रूप में जारी किया जाने वाला लीगल टेंडर है। यह फिएट मुद्रा की तरह ही है और इसके माध्यम से लेनदेन किया जा सकेगा।

क्रिप्टोकरेंसी से कैसे अलग है सीबीडीसी?
RBI के समर्थन से, CBDC सेंट्रलाइज्ड है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी डिसेंट्रलाइज्ड हैं। इसे जारी करने वाला कोई नहीं है और वे किसी भी व्यक्ति के लोन या देनदारियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

क्या सीबीडीसी डिजिटल पेमेंट के अन्य फॉर्म से बेहतर है?
हां, क्योंकि इससे अंतरबैंक सेटलमेंट की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके अलावा, डिजिटल मुद्रा भुगतान सिस्टम के बेहतर रियल टाइम और कॉस्ट इफेक्टिव ग्लोबेलाइजेशन की ओर ले जाएगी। इससे कोई भी भारतीय व्यापारी बिना किसी बिचौलिये के विदेशी खरीदारों को आसानी से भुगतान कर सकता है।

क्या भारत में डिजिटल करेंसी की जरूरत है?
सीबीडीसी भारत में कैश के उपयोग को रिप्लेस नहीं करेगा। हालांकि, भारत के डिजिटल मुद्रा पर स्विच करने से यह प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टिंग, स्टोरिंग और डिस्ट्रिब्यूटिंग की लागत को कम करेगा। डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है और कागजी मुद्रा का उपयोग कम हो रहा है। ऐसे में मुद्रा के इलेक्ट्रॉनिक रूप को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

सीबीडीसी का मौद्रिक नीति पर क्या असर होगा?
अतीत में, करेंसी की सप्लाई को बांड खरीद, मुद्राओं की बिक्री और खरीद, आदि के माध्यम से ट्रैक किया जाता था। हालांकि, सीबीडीसी का उपयोग पैसे की मांग का विश्लेषण कर सकता है और साथ ही नीति प्रबंधन में भी सुधार कर सकता है।

सीबीडीसी डिसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी क्या है कब लॉन्च होगा?
संसद में क्रिप्टो कानून पारित होने से पहले ऐसा प्रतीत नहीं होता है की सीबीडीसी लॉन्च होगा। सीबीडीसी के रोल आउट के लिए आरबीआई अधिनियम, The Coinage Act, फेमा और आईटी अधिनियम में संशोधन करना होगा क्योंकि इन कानूनी प्रावधानों को पेपर करेंसी को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

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