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बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स

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Investment Tips: महिलाओं के लिए बेस्ट हैं ये दो स्कीम, कम निवेश में होगा लाखों का फायदा

best investment for women

सभी अपने फ्यूचर के लिए इन्वेस्ट करते ही हैं। मेल इन्वेस्टर्स रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं। वैसे ही फीमेल इन्वेस्टर्स गोल्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट में ज्यादा इन्वेस्ट करना पसंद करती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कौन सा इन्वेस्ट महिलाओं के लिए है बेस्ट।

investment plan

महिलाएं कहां इन्वेस्ट करना पसंद करती हैं

रिपोर्ट्स बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स की मानें तो अधिकतर महिलाएं गोल्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट में इन्वेस्ट करना काफी ज्यादा पसंद करती हैं। इसके अलावा आज कल महिलाएं रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड में भी इन्वेस्ट करती हैं।

म्यूचुअल फंड में होता है फायदा

जिन भी महिलाओं को म्यूचुअल फंड के बारे मे अच्छे से पता है वह आसानी से म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर काफी पैसे कमा सकती हैं। म्यूचुअल फंड में भी कई प्रकार होते हैं।

इक्विटी म्यूचुअल फंड

इक्विटी फंड म्यूचुअल फंड की वो स्कीम है, जो खासकर शेयर्स/कंपनी के स्टॉक में निवेश करती है। इन्हें ग्रोथ फंड भी कहा जाता है। इसमें आप आसानी से पैसे निवेश कर सकते हैं।

डेट म्यूचुअल फंड

अगर आप अधिकतम तीन साल तक के लिए निवेश करना चाहते हैं और रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं तो फिर आपके सामने पहला विकल्प 'फिक्स्ड डिपॉजिट' का है। लेकिन अगर फिक्स्ड डिपॉजिट से थोड़ा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं तो फिर डेट फंड में निवेश कर सकते हैं।

हाइब्रिड म्यूचुअल फंड

हाइब्रिड फंड भी एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है जो एक ही फंड के अंदर कई एसेट क्लास में निवेश करता है। इसमें इन्वेस्ट करना काफी फायदे का सौदा हो सकता है।

महिलाएं सोने में इन्वेस्ट कर सकती हैं

सर्वे के अनुसार यह देखा गया है कि महिलाएं सोने में काफी ज्यादा इन्वेस्टर्स करती हैं। युवा पीढ़ी की महिलाएं भी गोल्ड में इन्वेस्ट करना पसंद करती हैं।

वहीं आज कल की युवा महिलाओं की बात करें तो वह अपनी बचत सुरक्षित और कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों में चुनना चाहती हैं।

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इन्वेस्टमेंट के ये 6 फॉर्मूले हर किसी को जानना है जरूरी

अगर आपने अब तक निवेश बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स शुरू नहीं किया है तो चिंता की कोई बात नहीं है. पढ़ने और सीखने की तरह निवेश की भी कोई उम्र नहीं होती. यद‍ि आप देर से निवेश करना शुरू करते हैं तो यह सुनिश्चित जरूर कीजिए कि निवेश के लिए ऐसे प्लान का चुनाव करें, जो आपके बर्बाद हुए समय की क्षतिपूर्ति करने में मदद कर सकते हों.

इन्वेस्मेंट टिप्स

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gnttv.com

  • नई दिल्ली,
  • 14 फरवरी 2022,
  • (Updated 14 फरवरी 2022, 4:50 PM IST)

पढ़ने और सीखने की तरह निवेश की भी कोई उम्र नहीं होती

लक्ष्यों को कम से कम जोखिम के साथ पूरा करें

हर कोई अपने भव‍िष्य को सुरक्ष‍ित करने के ल‍िए क‍िसी ना क‍िसी रूप में न‍िवेश (Investment) करता है. अगर आप अपने निवेश का सफर शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो इसकी शुरुआत अभी से करें. जाने माने निवेशक वारेन बफेट (Warren Buffett) भी इसी सिद्धांत में यकीन करते हैं और इसी का पालन भी करते हैं.

निवेश का सफर शुरू करने से पहले दो चीजों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए. समय और निवेश पर मिलने वाला रिटर्न यानी आरओआई (Return on Investment). जितने ज्यादा से ज्यादा समय के लिए आप निवेश करेंगे, उतना ही ज्यादा रिटर्न आपको मिलेगा. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप अपने लक्ष्यों को कम से कम जोखिम के साथ पूरा करेंगे. आपको उस धनराशि को ध्यान में रखकर योजना बनानी होगी, जो आप निवेश के जर‍िये भविष्य में हासिल करना चाहते हैं. यहां निवेश के गणित के कुछ ऐसे शानदार टिप्स दिए जा रहे हैं, जिससे आपके लिए चीजें काफी साफ और आसान बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स हो जाएंगी.

50-20-30 नियम
यह नियम उतना ही साफ है, जितना इसके नंबर. आपको अपनी रकम को तीन हिस्सों में बांटना होगा. टैक्स के बाद 50 फीसदी सैलरी को घरेलू खर्चों के लिए रखना होगा. 20 फीसदी को थोड़े-थोड़े समय पर पड़ने वाली जरूरतों के लिए रखना होगा और 30 फीसदी का निवेश भविष्य में पड़ने वाली जरूरतों के लिए रखना होगा.

15-15-15 नियम
ये नियम उनके लिए है, जो लंबी अवधि के निवेश में यकीन करते हैं. इसमें 15 हजार रुपए हर महीने ऐसे एसेट में 15 साल तक निवेश करने होते हैं, जो सालाना 15 फीसदी का रिटर्न दे. इक्विटी में किया गया निवेश इसके लिए उपयुक्त है. क्योंकि स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद शेयर बाजार ने हमेशा लंबी अवधि में 15 फीसदी रिटर्न देना सुनिश्चित किया है.

72 का नियम
यह नियम पैसे को दोगुना करने में लगने वाला समय बताता है. संभावित रिटर्न या ब्याज दर से 72 को भाग दें और देखें. एसआईपी (Systematic Investment Plan) में निवेश पर आपको 15% रिटर्न मिलता है, तो इसे डबल करने में लगने वाले समय को निकालने के लिए 72 को 15 से भाग दे सकते हैं, जो 4.8 साल के बराबर होगा.

114 का नियम
यह नियम रकम तिगुना करने में लगने वाले समय का हिसाब देता है. 114 को आप संभावित ब्याज दर से भाग देकर ये समय निकाल सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर निवेश से आपको सालाना 15 फीसदी रिटर्न मिलता है तो 114 को 15 से भाग दीजिए, जो 7.6 साल के बराबर है.

144 का नियम
यह आपके निवेश को एक नए स्तर पर ले जाता है. यह रूल हमें रकम को चौगुना करने के समय के बारे में बताता है. 144 को संभावित आरओआई से भाग दीजिए. इसी उदाहरण से आप 144 को 15 से भाग दें. इससे आपको 9.6 वर्ष मिलेंगे. जी हां, आपके पैसे को चार गुणा करने में 9.6 साल का समय लगेगा.

100 माइनस उम्र
यह संपत्ति का आवंटन करने के संबंध में हैं. 100 में से अपनी उम्र बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स को घटा दीजिए. जो नंबर आपको मिलेगा, वह प्रतिशत होगा, जिसका आपको शेयर बाजार में निवेश करना चाहिए. यह नियम इस पर आधारित है कि जितनी कम आपकी उम्र होगी, आपके जोखिम लेने की क्षमता उतनी ज्यादा होगी. इस अवधि में आपको जो घाटा होगा, आप उसकी भरपाई भी कर पाएंगे.

31 मार्च से पहले टैक्स बचाने के लिए हैं ये 5 शानदार इन्वेस्टमेंट टिप्स, मिलेगा डबल फायदा

सेक्शन 80सी टैक्स बचाने का सबसे प्रचलित सेक्शन है. इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए है और इसमें कई तरह के डिडक्शन को शामिल किया जा सकता है.

TV9 Bharatvarsh | Edited By: शशांक शेखर

Updated on: Mar 21, 2022, 10:56 AM IST

वित्त वर्ष 2021-22 में अब कुछ दिन ही बांकी रह गए हैं. अगर 31 मार्च तक इन्वेस्टमेंट और टैक्स सेविंग को लेकर स्मार्ट प्लानिंग नहीं की जाती है तो आपको ज्यादा टैक्स भरना पड़ सकता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब केवल अलग-अलग डिडक्शन का लाभ उठाना ही नहीं होता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब यह भी है कि किसी तरह के कैपिटल गेन को कैसे टैक्स फ्री किया जाए. इसके अलावा डिडक्शन का सबसे ज्यादा लाभ कहां मिल रहा है. आइए टैक्स बचाने स्मार्ट मूव्स के बारे में जानते हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी शानदार माना जाता है.

वित्त वर्ष 2021-22 में अब कुछ दिन ही बांकी रह गए हैं. अगर 31 मार्च तक इन्वेस्टमेंट और टैक्स सेविंग को लेकर स्मार्ट प्लानिंग नहीं की जाती है तो आपको ज्यादा टैक्स भरना पड़ सकता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब केवल अलग-अलग डिडक्शन का लाभ बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स उठाना ही नहीं होता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब यह भी है कि किसी तरह के कैपिटल गेन को कैसे टैक्स फ्री किया जाए. इसके अलावा डिडक्शन का सबसे ज्यादा लाभ कहां मिल रहा है. आइए टैक्स बचाने स्मार्ट मूव्स के बारे में जानते हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी शानदार माना जाता है.

टैक्स डिडक्शन पूरा क्लेम करें: सेक्शन 80सी टैक्स बचाने का सबसे प्रचलित सेक्शन है. इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए है और इसमें कई तरह के डिडक्शन को शामिल किया जा सकता है. कई टैक्सपेयर्स को यह भी पता नहीं होता है कि इस सेक्शन में कौन-कौन से क्लेम शामिल किए जा सकते हैं. सेक्शन 80सी में प्रोविडेंट फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन ईएमआई में प्रिंसिपल अमाउंट, बच्चों की ट्यूशन फीस, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स समेत कई तरह के खर्च को शामिल किया जा सकता है. टैक्सपेयर्स के नाते 80सी पूरी लिमिटि का इस्तेमाल करें.

टैक्स डिडक्शन पूरा क्लेम करें: सेक्शन 80सी टैक्स बचाने का सबसे प्रचलित सेक्शन है. इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए है और इसमें कई तरह के डिडक्शन को शामिल किया जा सकता है. कई टैक्सपेयर्स को यह भी पता नहीं होता है कि इस सेक्शन में कौन-कौन से क्लेम शामिल किए जा सकते हैं. सेक्शन 80सी में प्रोविडेंट फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन ईएमआई में प्रिंसिपल अमाउंट, बच्चों की ट्यूशन फीस, बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स समेत कई तरह के खर्च को शामिल किया जा सकता है. टैक्सपेयर्स के नाते 80सी पूरी लिमिटि का इस्तेमाल करें.

अगर आप नौकरी करते हैं तो नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश करना चाहिए. एनपीएस में निवेश करने पर सेक्शन 80CCD के तहत डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसमें एनपीएस के अलावा अटल पेंशन योजना को भी शामिल किया जा सकता है. NPS की मैक्सिमम लिमिट 1.5 लाख रुपए है. इसके अलावा सब सेक्शन 1बी यानी 80CCD (1B) के तहत 50 हजार के एडिशनल डिडक्शन का लाभ उठाया जा सकता है. कुल मिलाकर पेंशन फंड में निवेश करने पर मैक्सिमम 2 लाख तक का फायदा उठा सकते हैं.

अगर आप नौकरी करते हैं तो नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश करना चाहिए. एनपीएस में निवेश करने पर सेक्शन 80CCD के तहत डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसमें एनपीएस के अलावा अटल पेंशन योजना को भी शामिल किया जा सकता है. NPS की मैक्सिमम लिमिट 1.5 लाख रुपए है. इसके अलावा सब सेक्शन 1बी यानी 80CCD (1B) के तहत 50 हजार के एडिशनल डिडक्शन का लाभ उठाया जा सकता है. कुल मिलाकर पेंशन फंड में निवेश करने पर मैक्सिमम 2 लाख तक का फायदा उठा सकते हैं.

जैसा कि हम जानते हैं अगर आपका नेट टैक्सेबल इनकम 5 लाख से कम है तो किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है. अगर वह इससे ज्यादा होता है तो टैक्स लग जाएगा. पुराने टैक्स सिस्टम में डिडक्शन की सुविधा दी गई है. इसके तहत 2.5 लाख तक इनकम टैक्स फ्री है. 2.5 लाख से 5 लाख तक 5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है. 5-10 लाख के बीच 20 फीसदी का टैक्स लगता है. 10 लाख से ज्यादा टैक्सेबल इनकम होने पर 30 फीसदी का टैक्स लगता है. ऐसे में मामूली प्लानिंग की मदद से हजारों रुपए बचाए जा सकते हैं. किसी तरह अपने टैक्स स्लैब को घटाने पर फोकस होना चाहिए.

जैसा कि हम जानते हैं अगर आपका नेट टैक्सेबल इनकम 5 लाख से कम है तो किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है. अगर वह इससे ज्यादा होता है तो टैक्स लग जाएगा. पुराने टैक्स सिस्टम में डिडक्शन की सुविधा दी गई है. इसके तहत 2.5 लाख तक इनकम टैक्स फ्री है. 2.5 लाख से 5 लाख तक 5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है. 5-10 लाख के बीच 20 फीसदी का टैक्स लगता है. 10 लाख से ज्यादा टैक्सेबल इनकम होने पर 30 फीसदी का टैक्स लगता है. ऐसे में मामूली प्लानिंग की मदद से हजारों रुपए बचाए जा सकते हैं. किसी तरह अपने टैक्स स्लैब को घटाने पर फोकस होना चाहिए.

फाइनेंशियल प्लानर्स एक और सलाह देते हैं कि समय-समय पर निवेश को रिडीम करें और जरूरी के हिसाब से दोबारा इस फंड को टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करें. उनका यह मानना है कि हमेशा इमरजेंसी फंड में कुछ ना कुछ जमा रहना चाहिए. ऐसे में इन्वेस्टमेंट रिडीम करें और इमरजेंसी फंड में कुछ जमा करें. आपने जो कैपिटल गेन किया है उसे लंबी अवधि के लिए निवेश करें.

फाइनेंशियल प्लानर्स एक और सलाह देते बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स हैं कि समय-समय पर निवेश को रिडीम करें और जरूरी के हिसाब से दोबारा इस फंड को टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करें. उनका यह मानना है कि हमेशा इमरजेंसी फंड में कुछ ना कुछ जमा रहना चाहिए. ऐसे में इन्वेस्टमेंट रिडीम करें और इमरजेंसी फंड में कुछ जमा करें. आपने जो कैपिटल गेन किया है उसे लंबी अवधि के लिए निवेश करें.

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने से पहले गंभीरता से विचार करें. क्योंकि 31 मार्च में काफी कम समय रह गया है. ऐसे में इंश्योरेंस सेक्टर के एजेंट अपने क्लाइंट में जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाते हैं. निवेशक भी टैक्स बचाने के डर से यह फैसला जल्दबाजी में लेते हैं जो ठीक नहीं है. अगर लंबी अवधि के लिए निवेश करना है तो सोच-समझ कर फैसला लें. आने वाले कल में आपकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी, इस दिशा में भी विचार करें.

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स से पहले गंभीरता से विचार करें. क्योंकि 31 मार्च में काफी कम समय रह गया है. ऐसे में इंश्योरेंस सेक्टर के एजेंट अपने क्लाइंट में जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाते हैं. निवेशक भी टैक्स बचाने के डर से यह फैसला जल्दबाजी में लेते हैं जो ठीक नहीं है. अगर लंबी अवधि के लिए निवेश करना है तो सोच-समझ कर फैसला लें. आने वाले कल में आपकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी, इस दिशा में भी विचार करें.

31 मार्च से पहले टैक्स बचाने के लिए हैं ये 5 शानदार इन्वेस्टमेंट टिप्स, मिलेगा डबल फायदा

सेक्शन 80सी टैक्स बचाने का सबसे प्रचलित सेक्शन है. इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए है और इसमें कई तरह के डिडक्शन को शामिल किया जा सकता है.

TV9 Bharatvarsh | Edited By: शशांक शेखर

Updated on: Mar 21, 2022, 10:56 AM IST

वित्त वर्ष 2021-22 में अब कुछ दिन ही बांकी रह गए हैं. अगर 31 मार्च तक इन्वेस्टमेंट और टैक्स सेविंग को लेकर स्मार्ट प्लानिंग नहीं की जाती है तो आपको ज्यादा टैक्स भरना पड़ सकता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब केवल अलग-अलग डिडक्शन का लाभ उठाना ही नहीं होता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब यह भी है कि किसी तरह के कैपिटल गेन को कैसे टैक्स फ्री किया जाए. इसके अलावा डिडक्शन का सबसे ज्यादा लाभ कहां मिल रहा है. आइए टैक्स बचाने स्मार्ट मूव्स के बारे में जानते हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी शानदार माना जाता है.

वित्त वर्ष 2021-22 में अब कुछ दिन ही बांकी रह गए हैं. अगर 31 मार्च तक इन्वेस्टमेंट और टैक्स बेस्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स सेविंग को लेकर स्मार्ट प्लानिंग नहीं की जाती है तो आपको ज्यादा टैक्स भरना पड़ सकता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब केवल अलग-अलग डिडक्शन का लाभ उठाना ही नहीं होता है. टैक्स प्लानिंग का मतलब यह भी है कि किसी तरह के कैपिटल गेन को कैसे टैक्स फ्री किया जाए. इसके अलावा डिडक्शन का सबसे ज्यादा लाभ कहां मिल रहा है. आइए टैक्स बचाने स्मार्ट मूव्स के बारे में जानते हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी शानदार माना जाता है.

टैक्स डिडक्शन पूरा क्लेम करें: सेक्शन 80सी टैक्स बचाने का सबसे प्रचलित सेक्शन है. इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए है और इसमें कई तरह के डिडक्शन को शामिल किया जा सकता है. कई टैक्सपेयर्स को यह भी पता नहीं होता है कि इस सेक्शन में कौन-कौन से क्लेम शामिल किए जा सकते हैं. सेक्शन 80सी में प्रोविडेंट फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन ईएमआई में प्रिंसिपल अमाउंट, बच्चों की ट्यूशन फीस, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स समेत कई तरह के खर्च को शामिल किया जा सकता है. टैक्सपेयर्स के नाते 80सी पूरी लिमिटि का इस्तेमाल करें.

टैक्स डिडक्शन पूरा क्लेम करें: सेक्शन 80सी टैक्स बचाने का सबसे प्रचलित सेक्शन है. इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपए है और इसमें कई तरह के डिडक्शन को शामिल किया जा सकता है. कई टैक्सपेयर्स को यह भी पता नहीं होता है कि इस सेक्शन में कौन-कौन से क्लेम शामिल किए जा सकते हैं. सेक्शन 80सी में प्रोविडेंट फंड, पब्लिक प्रोविडेंट फंड, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन ईएमआई में प्रिंसिपल अमाउंट, बच्चों की ट्यूशन फीस, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स समेत कई तरह के खर्च को शामिल किया जा सकता है. टैक्सपेयर्स के नाते 80सी पूरी लिमिटि का इस्तेमाल करें.

अगर आप नौकरी करते हैं तो नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश करना चाहिए. एनपीएस में निवेश करने पर सेक्शन 80CCD के तहत डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसमें एनपीएस के अलावा अटल पेंशन योजना को भी शामिल किया जा सकता है. NPS की मैक्सिमम लिमिट 1.5 लाख रुपए है. इसके अलावा सब सेक्शन 1बी यानी 80CCD (1B) के तहत 50 हजार के एडिशनल डिडक्शन का लाभ उठाया जा सकता है. कुल मिलाकर पेंशन फंड में निवेश करने पर मैक्सिमम 2 लाख तक का फायदा उठा सकते हैं.

अगर आप नौकरी करते हैं तो नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश करना चाहिए. एनपीएस में निवेश करने पर सेक्शन 80CCD के तहत डिडक्शन का लाभ मिलता है. इसमें एनपीएस के अलावा अटल पेंशन योजना को भी शामिल किया जा सकता है. NPS की मैक्सिमम लिमिट 1.5 लाख रुपए है. इसके अलावा सब सेक्शन 1बी यानी 80CCD (1B) के तहत 50 हजार के एडिशनल डिडक्शन का लाभ उठाया जा सकता है. कुल मिलाकर पेंशन फंड में निवेश करने पर मैक्सिमम 2 लाख तक का फायदा उठा सकते हैं.

जैसा कि हम जानते हैं अगर आपका नेट टैक्सेबल इनकम 5 लाख से कम है तो किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है. अगर वह इससे ज्यादा होता है तो टैक्स लग जाएगा. पुराने टैक्स सिस्टम में डिडक्शन की सुविधा दी गई है. इसके तहत 2.5 लाख तक इनकम टैक्स फ्री है. 2.5 लाख से 5 लाख तक 5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है. 5-10 लाख के बीच 20 फीसदी का टैक्स लगता है. 10 लाख से ज्यादा टैक्सेबल इनकम होने पर 30 फीसदी का टैक्स लगता है. ऐसे में मामूली प्लानिंग की मदद से हजारों रुपए बचाए जा सकते हैं. किसी तरह अपने टैक्स स्लैब को घटाने पर फोकस होना चाहिए.

जैसा कि हम जानते हैं अगर आपका नेट टैक्सेबल इनकम 5 लाख से कम है तो किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है. अगर वह इससे ज्यादा होता है तो टैक्स लग जाएगा. पुराने टैक्स सिस्टम में डिडक्शन की सुविधा दी गई है. इसके तहत 2.5 लाख तक इनकम टैक्स फ्री है. 2.5 लाख से 5 लाख तक 5 फीसदी की दर से टैक्स लगता है. 5-10 लाख के बीच 20 फीसदी का टैक्स लगता है. 10 लाख से ज्यादा टैक्सेबल इनकम होने पर 30 फीसदी का टैक्स लगता है. ऐसे में मामूली प्लानिंग की मदद से हजारों रुपए बचाए जा सकते हैं. किसी तरह अपने टैक्स स्लैब को घटाने पर फोकस होना चाहिए.

फाइनेंशियल प्लानर्स एक और सलाह देते हैं कि समय-समय पर निवेश को रिडीम करें और जरूरी के हिसाब से दोबारा इस फंड को टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करें. उनका यह मानना है कि हमेशा इमरजेंसी फंड में कुछ ना कुछ जमा रहना चाहिए. ऐसे में इन्वेस्टमेंट रिडीम करें और इमरजेंसी फंड में कुछ जमा करें. आपने जो कैपिटल गेन किया है उसे लंबी अवधि के लिए निवेश करें.

फाइनेंशियल प्लानर्स एक और सलाह देते हैं कि समय-समय पर निवेश को रिडीम करें और जरूरी के हिसाब से दोबारा इस फंड को टैक्स सेविंग स्कीम्स में निवेश करें. उनका यह मानना है कि हमेशा इमरजेंसी फंड में कुछ ना कुछ जमा रहना चाहिए. ऐसे में इन्वेस्टमेंट रिडीम करें और इमरजेंसी फंड में कुछ जमा करें. आपने जो कैपिटल गेन किया है उसे लंबी अवधि के लिए निवेश करें.

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने से पहले गंभीरता से विचार करें. क्योंकि 31 मार्च में काफी कम समय रह गया है. ऐसे में इंश्योरेंस सेक्टर के एजेंट अपने क्लाइंट में जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाते हैं. निवेशक भी टैक्स बचाने के डर से यह फैसला जल्दबाजी में लेते हैं जो ठीक नहीं है. अगर लंबी अवधि के लिए निवेश करना है तो सोच-समझ कर फैसला लें. आने वाले कल में आपकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी, इस दिशा में भी विचार करें.

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